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आरती

ॐ जय महोर सिंह बाबा, श्री जय महोर सिंह बाबा ।।
थारी दया से निशिदिन दमक रही आभा ।।


बाबा रतिराम घर जन्मे उज्ज्वल कुल पाया
खुशी अपार भई घर पुत्र रत्न आया .. जय महोर...

दो अक्षर का नाम राम का मनभाया
इसी आशय से बाबा यश जग में छाया... जय महोर....

कपिल मुनी शुकदेव ज्यूँ आपे की पहचान
मर्यादा पुरुषोत्तम सम पाया शिक्षा ज्ञान .. जय महोर ..

दो हजार दस संवत भक्तों के जीवन प्राण
अस्त हुया आपे में तेजपुंज का भान.. जय महोर...

हितचित से सेवकगण धरें तिहारा ध्यान
कृपा करो राजेश के भर द्यो घट में ज्ञान.. जय महोर..

(तर्ज – बहुत प्यार करते हैं तुमको सनम)

बाबा महोर सिंह जी को सादर नमन
कृपा बनाये रखना हर एक छन ॥ टेक ।


थारी याद दिल में संजोए हुए
ख्वाबों खयालों में खोए हुए
बैठी ये संगत दीजै दिव्य दर्शन 1॥

श्रद्धाभाव संग ये पर्व मनाया है
मेला हरवर्ष लगे यही मनभाया है
गुणगान कर रहे सेवकगण 2॥

भक्तजन बाबा थारी महिमा सुनावैं
सत्संग रूपी गंग में गोता लगावैं
भागधारी है इनका निर्मल मन 3॥

सांगीत
ज्ञानी ज्ञाता आप सम सुना और कोई नांय
बाबा रतिरामजी का परचम दिया लहराय
दंगल शास्त्रार्थ जीते शिरोमणि पद पाय

ज्योतिष विद्या आपके याद थी भरपूर
व्याकरण शास्त्र का ज्ञान जो लिया जरूर
साहित्य और संस्कृत भाषा में हुए मशहूर

संत महात्माओं नै भी गुरु अपनाये आप
आमजन को जीवन का सहूर सिखाये आप
भक्तिरस, वीररस क्या ग्यारों रस गाये आप

संगीत कला मर्मज्ञ और काव्य के भंडार आप
शब्दों के पारखी और ज्ञान के हो सार आप
राजेश कोई कवि नही, बस एक आधार आप

थारी ऋचाओं का अभ्यास हम करते
अचल सुख के दाता का नाम सुमरते
थारी ही किरपा से ये खिला है चमन 4॥

मां शारदे की आराधना

मांई शारदा का ध्यान लगाओ
बल बुद्धि विद्या पाओ ॥


मांई ध्यान सदा मोहे तेरा है
नित चरणों में तेरे डेरा है
मुझपर किरपा बर्षाओ
मोहे विद्या दान दे जाओ 1॥

मांई अदभुत छवि तुम्हारी है
मैया हँस आपकी सवारी है
मांई हँस पै बैठ के आओ
मेरे घट में आसन लाओ 2॥

मांई वीणा पुस्तक धारणी
भगतों के कारज सारणी
निज दास पै दया दिखाओ
मेरा ज्ञान अपार बढ़ाओ 3॥

मांई रूप अनेक ये तेरे हैं
और नाम आपके घनेरे हैं
किस नाम से पुकारूं बताओ
‘राजेश’ को राह दिखाओ 4॥