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कवि परिचय

Pandit Mahor Singh

ब्रह्मवेता पंडित श्री महोर सिंह जी

पिता का नाम: पंडित रतिराम जी

माता का नाम: श्रीमती रुक्मणि देवी

जन्मतिथि: 03 दिसंबर 1869, मार्गशीर्ष, कृष्‍ण पक्ष, अ‍मावस्या, वार शुक्रवार, संवत 1926

पैतृक गाँव: साल्हावास, जिला झज्जर, हरियाणा

शिक्षा:

  1. भगवान भोलेनाथ की पवित्र काशी नगरी से संस्कृत भाषा में उच्चशिक्षा प्राप्त (समकक्ष वर्तमान PhD)
  2. चूरू, रामगढ़ (राज.) तथा डीघल, बेरी (हरियाणा) से गुरुकुल शिक्षा
  3. संगीत एवं काव्य शिक्षा के लिये 08 साल का कठिन अभ्यास
  4. संस्कृत व्याकरण एवं पिंगल छंद शास्त्र के अध्ययन के लिये सूरजगढ़ (राज॰) में “कायां सेठ की छतरी” नामक स्थान पर 05 वर्ष तक गहन अध्ययन

पंचतत्व में विलीन: 10 दिसंबर 1953, मार्गशीर्ष महीना, शुक्ल पक्ष, चतुर्थी तिथि, वार बृहस्पतिवार, संवत 2010

प्रमुख विशेषताएं:

  • ज्योतिष शास्त्र के प्रकांड विद्वान
  • व्याकरण शास्त्र
  • वेदों एवम्‌ शास्त्रों के विद्वान
  • पिंगल छंद शैली के ज्ञाता
  • गीतकार
  • संगीतकार
  • भजन सम्राट
  • आशुकवि
  • कथाकार
  • सनातन के पुरोधा

प्रमुख रचनाएं:

  • नल दमयंती कथा
  • राजा हरिश्चंद्र कथा
  • राजा उत्तानपाद कथा
  • भगवान श्रीकृष्ण जन्म कथा
  • ऊषा अनिरुद्ध कथा
  • शिव पार्वती विवाह
  • महाभारत कथा (लगभग संपूर्ण)
  • अश्वमेध पर्व
  • ब्रह्मज्ञान एवं निर्गुण
  • फुटकर भजन